ईद की दुआओ में मांगा कब्ररिस्तान

एन,एन.आई । आगरा शहर से लगभग 3० किमी दूर छह पोखरा  गांव के मुस्लिम परिवार  ईद पर अल्लाह से दुआ कर कब्रिस्तान मांगते हैं। हर घर के बाहर उनके परिवार के लोगों का कब्रिस्तान है। वहीं, कई लोगों का मानना है कि कब्र की वजह से उनके घर के बच्चों को कथित रूप से शैतान पकड़ लेता है। इसके बाद वह झाड़फूंक के चक्कर में फंसते हैं। गांव के कई बच्चे सालों से बीमार हैं।

  अछनेरा कस्बे के पोखर छह में करीब 35 मुस्लिम परिवार रहते हैं। सभी मजदूरी का काम करते हैं। गांव में मुस्लिम परिवारों की आबादी करीब 200 की है। लेकिन, यहां एक भी कब्रिस्तान नहीं है। लोग अपने परिजनों का अंतिम संस्कार अपने घर के बाहर करते हैं। पिछले 60 सालों में यहां 50 से अधिक मुस्लिमों की मौत हुई है और उन्हें घर के बाहर ही दफनाया गया है। वहीं, गांव के पोखरे के किनारे बसे होने के कारण कई कब्र बारिश में पानी भरने से धंस कर खत्म हो गई है।

 यहां की रहने वाली जुनेषा के घर के बाहर इनके ससुर हुसैन खान की कब्र है। नूरबानो बताती हैं कि उनकी 18 साल की बेटी रजिया पिछले तीन साल से बीमार है और कोई दवा का असर नहीं होता है। इस कारण अब झाड़फूंक का इलाज चल रहा है। यहीं पड़ोस की रहने वाली बेबी के घर में एक कथित तांत्रिक उसकी 16 साल की बेटी मुमताज का झाड़फूंक के जरिए इलाज कर रहा था।

घर के युवक लाल खान  ने बताया कि वे मजदूरी करते हैं।  गांव में कब्रिस्तान न होने के कारण उनके परिवार का कोई मरता है तो उन्हें घर के बाहर दफनाते हैं।  अब कोई रूह अच्छी होती है और कोई शैतान। घर के काम करने और निकलने पर पैर लग जाता है, जिससे ऊपरी चक्कर हो जाते हैं। कई घरो के बच्चे सालों से बीमार हैं।

बता दें कि 50 से अधिक लोग अब तक यहां दफन हुए हैं। बारिश में पोखर में पानी चढ़ जाता है और उसके कारण कब्र धंस कर खत्म हो गई हैं। हमारे यहां तो हर ईद पर दुआ में कब्रिस्तान मांगा जाता है, लेकिन यह आस पूरी नहीं होती है। कागजों में आज भी 387,388,389 नंबर पट्टा कब्रिस्तान के नाम है। जब भी शिकायत की जाती है तो नपाइश में पोखरे के अंदर की जगह बताई जाती है।  जब तालाब कब्रिस्तान की जमीन पर है तो असल तालाब कहां है।  हालत इस कदर ख़राब है की दूसरा कब्रिसत्न लगभग 16 किमी दूर है और वहां भी वहां के स्थानीय मुस्लिम विरोध करते है ।