अब UP के मदरसों में पढ़ाया जाएगा तीन तलाक पाठ, वर्कशॉप में भी दी जाएगी जानकारी

बरेली. मुस्लिम पर्सनल लॉ में फेरबदल और तीन तलाक को नाजायज ठहराने के बाद से उलेमाओं में खासी हलचल है। शरीयत की रौशनी में तीन तलाक को वाजिब मानने वाले मुस्लिम धर्मगुरुओं ने इसके लिए व्यापक चिंता भी व्यक्त की है। उलेमाओं का मानना है कि तीन तलाक की प्रक्रिया के दुरुपयोग ने ही इस व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं। लिहाजा अब तलाक के सही परिस्थितियों और तरीकों की जानकारी देने के लिए मदरसों में तीन तलाक का पाठ पढ़ाया जाएगा। सुन्नी मुसलमानों के सबसे बड़े मरकज दरगाह आला हजरत की ओर से इसकी पहल की गई है।

 

उलेमाओं का क्या मानना है

-देश में तीन तलाक पर भले ही सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगाकर संसद को 6 महीने के अंदर कानून बनाने को कहा हो। 

-लेकिन बिना मुस्लिम धर्मगुरुओं से मशवरे के मुस्लिम पर्सनल लॉ में फेरबदल करना उलेमाओं के विरोध की बड़ी वजह बन सकता है। 

-बरेली में उलेमाओं का शुरू से मानना रहा है महिलाओं को राहत देने के साथ इस बात का भी ख्याल रखा जाए कि नया कानून बनाने शरीयत के साथ छेड़छाड़ न की जाए। 

 

आलाहजरत ने की बड़ी पहल 

-वहीं तलाक के मसले पर बरेली की दरगाह आलाहज़रत से भी बड़ी पहल की शुरुआत हुई है। 

-जिसके तहत रुहेलखंड रीजन में मदरसों में तीन तलाक का पाठ भी पढ़ाया जाएगा।

-जिसका मकसद होगा तलाक़ से संबंधित सही जानकारी देना है। जिससे तीन तलाक का दुरुपयोग न हो सके।

-उलेमाओं का मानना है कि मदरसा पाठ्यक्रम में तलाक के विषय को शामिल किया जाएगा।

-साथ ही अलग कक्षा लगाकर तालीम हासिल कर रहे छात्रों को तलाक के सही तरीकों और बारीकियों की जानकारी दी जाएगी। 

-जिससे मुसलमान न सिर्फ बेवजह ही तलाक देने से बचेंगे बल्कि तलाक के चलते होने वाली आर्थिक और मानसिक परेशानी से भी बच सकेंगे।

 

दरगाह ने जारी किया हेल्पलाइन नंबर 

-इसके लिए दरगाह से जुड़े मौलवी, उलेमाओं ने फैसला किया है अवाम को इस पहल से जोड़ने के लिए रुहेलखंड में सेमिनार के साथ वर्कशॉप आयोजियत किये जायेंगे। 

-वहीं तलाक से जुड़े मसले पर किसी भी सलाह लेने के लिए दरगाह के सहायता केंद्र पर कॉल करके अपनी समस्या का हल प्राप्त कर सकेंगे।  

-इसके लिए दरगाह द्वारा हेल्पलाइन नम्बर भी जारी किया गया है।

-मदरसों के पाठ्यक्रम में तलाक विषय को शामिल करना एक अच्छी पहल जरूर हो सकतीं है। 

-लेकिन नाबालिग बच्चों के बीच निकाह और तलाक जैसे बारीक और पेचीदे विषय की जानकारी साझा करना कितना कारगर होगा यह चिंता का विषय है।