हमने ने किया स्कूलों का रियलिटी चेक: पढ़ें, हैरान कर देनेवाले खुलासे

लखनऊ. गुरुग्राम के मशहूर रेयान स्कूल में मासूम प्रद्युम्न की निर्मम हत्या के बाद देश के सभी माता-पिता बेहद चिंतित हैं। किसी को भी स्कूल की सुरक्षा व्यवस्था पर भरोसा नहीं रहा। सभी अपने-अपने बच्चों के स्कूल की सुरक्षा व्यवस्था के बारे में जानना चाहते हैं। वो जानना चाहते हैं कि जहां उनका मासूम बेटा या बेटी पढ़ रही है क्या वो वहां महफूज हैं या फिर नहीं.. समाचार प्लस भी अभिभावकों की चिंता को बखूबी समझता है...अपने सामाजिक जिम्मेदारियों को निभाना जानता है..इसीलिए हम प्रदेश के दर्जनों स्कूलों में रियलिटी चेक करने के लिए पहुंचे। यहां जहां कई स्कूल हमारी पड़ताल में फेल हो गए तो कुछ ही पास हो पाए। देखिए आपकी आंख खोल देनेवाली खास रिपोर्ट...      

 

रायबरेली का रेयान इंटरनेश्नल स्कूल

गुरुग्राम के रेयान इंटरनेश्नल स्कूल में जो हुआ, उसके बाद प्राइवेट स्कूलों पर जो भरोसा अभिभावकों का था वो टूट चुका है। ऐसे में सवाल ये खड़ा होता है कि आज प्राइवेट स्कूल कितने सुरक्षित हैं। क्या इन स्कूलों में सरकारी गाइडलाइंस का पालन किया जा रहा है... क्या ये स्कूल नियमों के मुताबिक चल रहे हैं... ये जानने के लिए समाचार प्लस ने इन प्राइवेट स्कूलों की रियालिटी को चेक किया... पहले रायबरेली के रेयान इंटरनेश्नल स्कूल का हाल... जो हकीकत सामने आई वो बेहद चैकाने वाली थी... 

हमने पाया कि यहां बच्चों की सुरक्षा रामभरोसे है। ना तो सुरक्षा के बंदोबस्त किए गए और ना ही सफाई की चिंता की गई। बस डृाइवर और कंडक्टर के पास आई कार्ड भी नहीं थे। 

प्राइवेट स्कूलों के बड़े नाम और ऊंची बिल्डिंगे देख कर मां-बाप अपने बच्चों का दाखिला इन स्कूलों में कराते हैं....भविष्य संवारने के नाम पर ये स्कूल मोटी फीस वसूलते हैं... उगाही करते हैं... ट्यूशन फीस के अलावा साल भर कई तरह के फंड लिए जाते हैं.. मां बाप का ये भरोसा है कि बच्चे या तो घर पर वरना स्कूल में सुरक्षित हैं...सुरक्षा देने के नाम पर बस मोटी फीस ली जा रही है...सिर्फ बातें हो रही हैं.... या फिर कुछ काम भी हो रहा है...हकीकत क्या है... ये जानने के लिए समाचार प्लस ने कई स्कूलों का जायजा लिया,... और इसके बाद जो सच हमारे सामने आया उसे जानकर आप हैरान हो जांएगे... आपको झटका लग सकता है... लेकिन आप ये जान लीजिए कि आपके बच्चे कहीं भी सुरक्षित नहीं हैं... कम से कम इन स्कूलों में तो बिल्कुल नहीं.... 

ये है रायबेरली का मशहूर और सबसे महंगा स्कूल... नाम है रेयान इंटरनेश्नल... जब हमारी टीम यहां पहुंची तो स्कूल शुरू हो चुका था... हमने स्कूल के अंदर जाने की कोशिश की... लेकिन हमें मेन गेट पर ही रोक दिया गया... हमारी लाख कोशिशों के बाद भी गार्ड ने हमें अंदर जाने नहीं दिया,.... फिर हमने बाहर खड़े हो कर ही गार्ड से बात की... जानना चाहा कि उसके पास आई कार्ड है नहीं... गार्ड के पास स्कूल का दिया हुआ कोई आई कार्ड नहीं था। 

ये तो महज छोटा सा ट्रेलर था हमारे संवाददाता रोहित मिश्रा ने इस स्कूल का जायजा लिया तो उनके भी होश उड़ गए... स्कूल के अंदर ना तो सुरक्षा के माकूल इंतजाम हैं... ना ही कोई सीसीटीवी कैमरा कहीं लगाया गया है...जो तस्वीर हमने देखी उसने हमें चौका दिया...

आपको अभी स्कूल के अंदर का पूरा हाल भी बताएंगे। हालत ये है कि ना तो बस के ड्राइवर के पास ना ही कंडक्टर के पास स्कूल का आई कार्ड है... ना ही इनका पुलिस वैरिफिकेशन हुआ है.. ना ही इनके पास कोई और दस्तावेज है... जो ये प्रमाणित कर सके कि ये इसी स्कूल में काम करते हैं..

देखा आपने जिन स्कूल बसों को आप बेहद सुरक्षित और महफूज समझते हैं... ये उनका हाल है... जो ड्राइवर बस को चला रहा है उसके पास स्कूल का आई कार्ड तक नहीं है... जरा सोचिए कितने सुरक्षित हैं इस स्कूल बस में आपके बच्चे... खैर आगे बढ़ते हैं... हमने स्कूल के बच्चों से बात की... जानना चाहा कि क्या इनके पास आई कार्ड हैं... तो पता चला कि स्कूल के  छात्रों के पास भी आईकार्ड नदारद है... मतलब कोई छात्र स्कूल की यूनीफॉर्म पहन कर स्कूल में दाखिल हो जाए और किसी भी तरह की वारदात को अंजाम देदे...

लाइब्रेरी में पाखंडी बाबा राम रहीम के फोटों लगी मैगजीन शोभा बढ़ा रही है....इस मैगजीन को देख कर और पढ़ कर ना जाने इस स्कूल के छोटे और ना समझ बच्चों के जहन पर क्या असर पड़ेगा.. ये स्कूल प्रशासन ही जाने... हमे इस रेयान स्कूल में एक और चैकाने वाली बात पता चली... सोनिया, राहुल प्रियंका वाली तस्वीरों के जरिए सियासत का पाठ पढ़ाया जा रहा है। नर्सरी राइम्स में स्कूल राजनीति का ककहरा तो नहीं सिखा रहा। 

इस पूरे मामले में जब विद्यालय प्रशासन से बात करने की कोशिश की गई... तो कोई भी कुछ भी बोलने को तैयार नहीं हुआ... पुलिस और प्रशासन का दरवाजा भी खटखटाया गया... जानना चाहा कि बिना पुलिस वैरिफिकेशन के स्कूली बसें कैसे सड़क पर दौड़ रही हैं... तो जनाब एसपी रायबरेली शिव हरी मीणा कार्रवाई का भरोसा दे रहे हैं....

ऐसे में सवाल यह उठता है कि क्या गुरूग्राम की तरह रायबरेली के रेयान इंटरनेशनल स्कूल में भी कोई खामिया है अगर नहीं तो विद्यालय प्रशासन मीडिया कर्मियो से क्यों बच रहा है।

 

गाजियाबाद के स्प्रिंग डेल स्कूल का हाल

 

हमारी टीम दिल्ली से सटे गाजियाबाद के स्कूलों का भी जायजा लेने पहुंची.... गाजियाबाद में हमने बड़े रसूखदार स्कूलों का जायजा लिया... और इसके बाद जो तस्वीर हमारे सामने आई वो बेहद चैकाने वाली थी...

ऑपरेशन स्कूल में हम जा पहुंचे गाजियाबाद... हमने सबसे पहले शहर के नामी स्कूल स्प्रिंग डेल्स का जायजा लिया... वहां के हालात और सुरक्षा की पड़ताल की... लेकिन इसके बाद जो सच हमारे सामने आया उसने हमें झकझोर दिया... ना तो हमें गेट पर गार्ड मिला और ना ही कोई दूसरा गेटवाच मैन...हमारी टीम ने जब अंदर जाने की कोशिश की तो उसने साफ इंकार कर दिया। खुलेआम स्कूलों आपके बच्चों की सुरक्षा से खिलवाड़ कर रहे हैं

वैरिफिकेशन होता क्या है... आप इस बात से अंदाजा लगा सकते हैं... कि इनके दस्तावेज पुलिस तो बहुत दूर की बात है स्कूल प्रशासन के पास भी हो इस बात पर भी संदेह है... और आईकार्ड का तो सवाल ही पैदा नहीं होता.... बिना पुलिस वैरिफिकेशन के और बिना आईकार्ड के एक गार्ड स्कूल के गेट पर तैनात है... जरा सोचिए आपके नौनिहाल कितने सुरक्षित हैं... ना तो बसों में माकूल सुरक्षा के इंतेजाम हैं... और ना ही कानूनों का पालन हो रहा है.... बस के अंदर आग बुझाने के लिए किसी तरह का इंतजाम नहीं है... और तो और जो इन बसों को चला रहे हैं ना तो उनका पुलिस वेरिफिकेशन हुआ है और ना ही उनके पास आई कार्ड है... मतलब आपकी सुरक्षा के साथ खुलेआम खिलवाड़... जिस स्कूल को आप अपने बच्चे के लिए बेहद महफूज मानते हैं... उसी स्कूल में आपका बच्चा कितना सुरक्षित है आप खुद ही इसका अंदाजा लगाइये।

 

गगन पब्लिक स्कूल, अलीगढ़ 

हमारी टीम पहुंची अलीगढ़ के गगन पब्लिक स्कूल में... स्कूल के गेट पर तो कोई मौजूद नहीं है... लेकिन सिक्योरिटी रूम में कुछ लोग सोते मिले... ये दोनों बहुत आराम से सो रहे थे... हमारी टीम को देख वहां मौजूद दूसरे लोगों ने इन लोगों को जगाया... और वो भाग निकले... 

गगन पब्लिक स्कूल के अंदर हम जैसे ही दाखिल हुए हमने देखा के कई गैर स्कूली वाहन वहां खड़े थे... हमने जब एक ऑटो में ड्राइवर से बात की तो पता चला कि उसके ऑटों का ना तो परमिट है...  और ना ही  किसी तरह की कोई परमीशन.... लेकिन इसके बाद भी इनका ऑटो पिछले दो सालों से इस स्कूल के छात्रों को घर से लाने और छोड़ने का काम कर रहा है.... ऐसे में आप अंदाजा लगा सकते हैं कि पुलिस वैरिफिकेशन का क्या हाल होगा...

हम स्कूल परिसर में बने टॉयलेट्स का जायजा लेने पहुंचे.. हमने वहां पर मौजूद एक सफाई कर्मचारी से बात की... तो पता चला कि ना तो इनके पास कोई आई कार्ड है... और ना ही किसी तरह का इनका पुलिस वैरिफिकेशन कराया गया है... मतलब साफ है कि आपके नौनिहालों की जिंदगी ऐसे लोगों के हाथ में हैं जिनके बारे में स्कूल प्रशासन के पास कोई जानकारी नहीं है... अगर कल को भगवान ना करें कोई अनहोनी हो जाए... तो ये लोग आसानी भाग निकलने में कामयाब हो जाएंगे....

पूरे स्कूल में कहीं भी कोई सीसीटीवी कैमरा नहीं दिखा...हालंकि स्कूल के मैनेजर साहब ये जरूर कह रहे हैं कि उन्हे सीसीटीवी कैमरों को लगवाने की जरूरत कभी महसूस ही नहीं हुई...

मतलब जरा सोचिए .... जिस स्कूल के मैनेजर का ये कहना हो कि हमें सीसीटीवी लगवाने की जरूरत ही कबी नहीं लगी... तो आपके बच्चों की सुरक्षा कितने पुख्ता हाथों में है....

 

स्कूल न्यू वे स्कूल लखनऊ

हमारे ऑपरेशन स्कूल के दौरान हमारी टीम जा पहुंची राजधानी लखनऊ के स्कूलों का जायजा लेने... लेकिन जो हकीकत हमारे सामने आई वो बेहद हैरान कर देने वाली थी... बेहद चैंकाने वाली थी... ये हाल उस शहर के स्कूलों का है जिसे सूबे की राजधानी होने का दर्जा हासिल है.. जहां से सूबे का पूरा निजाम चलता है... प्रदेश का हर बड़ा अधिकारी और हर बडे़ मंत्री इसी शहर में डेरा जमाए रहता है... लेकिन इस सबके बावजूद लखनऊ के स्कूलों का हालत ये है कि इनमें पढ़ रहे आपके बच्चों की सुरक्षा भगवान भरोसे ही है... 

अपनी कमर में पिस्टल लगाए  टीम स्कूल में दाखिल हुई। बिना रोक टोक के स्कूल के अंदर घूमी लेकिन कही कोई जांच नहीं हुई।

स्कूल के प्रांगण में  टीम का एक सदस्य खुले आम अपनी पैंट में लाइसेंसी रिवॉल्वर लगाए तकरीबन 20 मिनट तक घूमता रहा.... वो स्कूल के मेन गेट से रिवॉल्वर लगाकर दाखिल हुआ और तकरीबन 20 मिनट तक स्कूल में ही इधर से उधर टहलता रहा... इस दौरान ना तो उसकी गेट पर तलाशी ली गई... ना ही किसी ने उसे रोका.. हालत तो ये है कि गेट पर किसी भी शख्स ने उसकी रजिस्टर में एंट्री तक नहीं कराई.... क्योंकि गेट पर कोई मौजूद ही नहीं था... हमारी टीम का सदस्य खुले आम इस तमंचे के साथ स्कूल परिसर में 20 मिनट तक मौजूद रहा... स्कूल के टीचरों और कर्मचारियों के बीच ये शख्स एक लाइसेंसी रिवॉलवर के साथ टहलता रहा... लेकिन किसी की भी नजर इसकी कमर में लगे इस रिवॉल्वर पर नहीं गई... ये तो हाल है स्कूल के सुरक्षा इंतजामों का

बच्चों को स्कूल वैन में ठूस ठूस कर भरा जाता है। बच्चे एक के ऊपर एक बैठे हुए है... जब हमने ड्राइवर से बात की और ये जाना कि क्या उसका पुलिस वैरिफिकेशन हुआ है तो पता चला कि ना तो इनके पास आईकार्ड हैं और ना ही इनका पुलिस वैरिफिकेशन हुआ...