गुजरात के सीएम की दौड़ में विजय रूपाणी सबसे आगे, शाम तक क्लीयर हो जाएगी पिक्चर

गुजरात और हिमाचल प्रदेश में आज बीजेपी विधायक दल के नेताओं का चयन हो सकता है। बीजेपी केंद्रीय नेतृत्व की ओर से विधायकों से बातचीत करने के लिए अधिकृत किए गए दलों के सदस्य आज गुजरात और हिमाचल प्रदेश पहुंच रहे हैं। गुजरात के लिए पार्टी ने वित्तमंत्री अरुण जेटली और पार्टी महासचिव सरोज पांडेय को अधिकृत किया है, जबकि हिमाचल प्रदेश के लिए रक्षामंत्री निर्मला सीतारमण और नरेंद्र सिंह तोमर आज दोपहर बाद विधायकों से बातचीत कर सीएम के नाम पर चर्चा करेंगे। 

बताया जाता है कि सभी पर्यवेक्षक दिल्ली में लौटने के बाद पार्टी अध्यक्ष अमित शाह को अपनी रिपोर्ट देंगे। इसके बाद ही दोनों राज्यों में विधायक दल के नेता के नाम का ऐलान किया जाएगा।

कांटे की टक्कर में बीजेपी गुजरात फतह करने में तो कामयाब रही लेकिन गुजरात के मुख्यमंत्री को लेकर मंथन जारी है। आज गांधीनगर में जीतकर आए बीजेपी के विधायकों की बैठक होगी, जिसमें तय होगा कि किसके सिर ताज सजेगा।

आज की बैठक में बीजेपी के केंद्रीय पर्यवेक्षक अरुण जेटली, सरोज पांडे, भूपेंद्र यादव और वी. सतीश भी हिस्सा लेंगे। दोपहर साढ़े तीन बजे गांधीनगर के गुजरात बीजेपी मुख्यालय कमलम में विधायक दल की बैठक होगी। 

गुजरात में मुख्यमंत्री की दौड़ में विजय रूपाणी दौड़ में सबसे आगे हैं। वैसे इस पद के लिए केंद्रीय मंत्री मनसुख मांडविया का नाम भी चल रहा है लेकिन जानकारों का कहना है कि ऐसे वक्त जब बीजेपी के पास संख्या बल ज्यादा नहीं है, पार्टी विधायकों से अलग किसी को मुख्यमंत्री चुनने का जोखिम नहीं उठा सकती है। ऐसी परिस्थिति में विजय रूपाणी की संभावना ज्यादा है। 

गुजरात के मुख्यमंत्री की रेस में फिलहाल मौजूदा मुख्यमंत्री विजय रूपाणी के साथ-साथ उप मुख्यमंत्री रह चुके नितिन पटेल, मनसुख मांडविया और पुरूषोत्तम रूपाला शामिल हैं।

वहीं एक वर्ग का मानना है कि पाटीदारों की नाराजगी को दूर करने के लिए राज्यसभा सदस्य मनसुख मांडविया को सीएम की जिम्मेदारी दी जा सकती है। वे लेउआ पटेल समुदाय से आते हैं। 

विजय रूपाणी के पक्ष में ये बातें आती है कि बीजेपी ने उन्हें ही चेहरा बनाकर चुनाव लड़ा और पार्टी मौजूदा हालात में 2019 से पहले गुजरात में चुनाव मैदान में उतरना नहीं चाहती। 

सूत्रों के मुताबिक गुजरात के नए मुख्यमंत्री का शपथ-ग्रहण 25 दिसंबर को हो सकता है, क्योंकि इस दिन पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का जन्मदिन है। साल 2012 के चुनावों के बाद नरेंद्र मोदी ने चैथी बार 25 दिसंबर को ही शपथ ग्रहण किया था।