झारखंड में पत्थलगढ़ी की आंच पहुंची स्कूलों तक, सरकारी स्कूलों में और किताबों को पढ़ने से किया इनकार

 रांचीः झारखंड में बिरसा मुंडा की धरती और नक्सल प्रभावित खूंटी और आसपास के कुछ खास आदिवासी इलाके इन दिनों चर्चा में है। पिछले कुछ समय से इन क्षेत्रों के आदिवासी गांवों में पत्थलगड़ी कर अपना शासन, अपनी हुकूमत की मुनादी कर रहे हैं।

दरअसल, इन इलाकों में पत्थलगड़ी (बड़ा शिलालेख गाड़ने) की परंपरा पुरानी है। इनमें मौजा, सीमाना, ग्रामसभा और अधिकार की जानकारी रहती है। वंशावली, पुरखे तथा मरनी (मृत व्यक्ति) की याद संजोए रखने के लिए भी पत्थलगड़ी की जाती है। कई जगहों पर अंग्रेजों व दुश्मनों के खिलाफ लड़कर शहीद होने वाले वीर सूपतों के सम्मान में भी पत्थलगड़ी की जाती रही है। 

अब यही पत्थलगढ़ी सरकार के लिए चिंता का विषय बन गया है। 25 फरवरी को खूंटी के कोचांग समेत छह गांवों में पत्थलगड़ी कर आदिवासियों ने अपनी कथित हुकूमत की हुंकार भरी। 

इसके तीन दिन बाद यानी 28 फरवरी को खूंटी जिला मुख्यालय में आयोजित बीजेपी के कार्यकर्ता सम्मेलन में शिरकत करने पहुंचे मुख्यमंत्री रघुबर दास ने पत्थलगढ़ी की आड़ में देश विरोधी गतिविधियों को हवा देने वालों से सख्ती से निपटने को कहा। मुख्यमंत्री ने कहा है कि पत्थलगड़ी की आड़ में देश विरोधी शक्तियां सक्रिय हैं. इन्हें सरकार कुचल कर रख देगी।

मुख्यमंत्री ने कहा पत्थलगड़ी झारखंड की परंपरा है, लेकिन विकास के काम रोकने तथा भोलेभाले आदिवासियों को बरगलाने के लिए नहीं। इन्हीं शक्तियों ने भगवान बिरसा को अंग्रेजों के हाथों पकड़वाया था।

झारखंड के खूंटी शहर के पत्थलगड़ी की आंच अब विद्यालयों तक पहुंच चुकी है। पहले ग्रामीणों ने ग्रामसभा में अपने बच्चों को विद्यालय नहीं भेजने का फरमान जारी किया और अब ग्राम सभा का नया फरमान जारी हो चुका है कि बच्चे पढ़ेंगे लेकिन सरकारी विद्यालयों में और सरकारी पाठयक्रम में नहीं, बल्कि ग्राम के चबूतरा में और आदिवासियों द्वारा जारी किये गये भाषा और किताबों से पढ़ेंगे।

इसकी शुरुआत मुरहू प्रखंड के उदबूरू गांव के चैपाल से कर दी गई है। यहां बच्चों को पढ़ाई कराया जा रहा हैं, और बच्चे भी मन लगा कर पढ़ रहे हैं।

जिसमें गांव के ही पढ़े लिखे नौजवानों को शिक्षक नियुक्त किया गया है, वहीं इसकी जानकारी शिक्षा विभाग को भी है जो आगे की कार्वाई के लिये आलाअधिकारियों को सूचना देने की बात कर रहे हैं।