जूना अखाड़ा में पहली बार इस दलित साधु को दी जाएगी 'महामंडलेश्‍वर' की उपाधि

इलाहाबाद. साधु संतो की सर्वोच्च संस्था अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद में शामिल जूना अखाड़े ने एक दलित साधु को महामंडलेश्वर बनाने की घोषणा की है। इलाहाबाद के मौज गिरी आश्रम में जूना अखाड़े के साधु-संतो की मौजूदगी में दलित संत कन्हैया कुमार कश्यप दीक्षा और संस्कार के बाद कन्हैया प्रभुनंद गिरी बन गए हैं। सनातन संस्कृति के इतिहास में किसी दलित को महामंडलेश्वर उपाधि देने का अखाड़े का यह पहला निर्णय है।

-दरअसल, इलाहाबाद में स्थित जूना अखाड़े के मौजगिरी आश्रम में दलित संत का संस्कार कर उन्हें धर्माचार्य पद के लिए योग्य घोषित कर दिया गया है। हांलाकि अखाड़ों की बैठक के बाद ही उनकी पदवी की घोषणा की जाएगी। 

-जूना अखाड़ा के संत पंचानन गिरी के मुताबिक सनातन धर्म में बड़े पैमाने पर कुरीतियां और रही हैं जिससे धर्म का पतन हो रहा था। जिसके रोकने के लिए जूना अखाड़े ने अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद की सहमति से ही दलित संत को धर्माचार्य की पदवी देने के लिए उनका संस्कार कराया है। 

-उनके मुताबिक सनातन धर्म में कई दलित संत हुए हैं जिनका सभी ने पूरा सम्मान भी किया है। इसलिए आज सनातन धर्म को बचाने के लिए योग्य दलित को भी धर्माचार्य पद के लिए घोषित किया जा रहा है। उनके मुताबिक आने वाले कुम्भ में ऐसे और भी दलित संतों को जो कि योग्य हैं उन्हें भी धर्माचार्य की बड़ी पदवी दी जायेगी। 

 

क्या बोले साधु

-वहीं कन्हैया कुमार कश्यप से कन्हैया प्रभुनंद गिरी बने दलित संत का कहना है कि उन्होंने कभी जीवन में ऐसी कल्पना नहीं की थी कि अनुसूचित जाति से होने के बाद भी बड़े धर्माचार्य के पद पर कभी आसीन हो सकते हैं।

 

कौन हैं कन्हैया कुमार कश्यप 

-कन्हैया कुमार कश्यप आजमगढ़ के ग्राम बरौनी दिवाकर पट्टी के रहने वाले हैं। 

-उन्होंने साल 2016 के उज्जैन स्थित सिंहस्थ कुंभ में पटियाला (पंजाब) काली मंदिर स्थित जूना अखाड़े के महंत पंचानन गिरि महाराज से पहली बार संन्यास दीक्षा ली थी। 

-तब महंत पंचानन गिरि महाराज ने उनका नामकरण कन्हैया प्रभुनंद गिरि के रूप में किया था।