आजम खान पर कसा कानून का शिकंजा, वक्फ की जमीन पर बनाया शोध संस्थान, फिर उसे लीज पर दे दिया

लखनऊ. पूर्व मंत्री और समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता आजम खान पर सरकार का फंदा कसता जा रहा है।  जल निगम भर्ती घोटाले के बाद अब एक और मामले में उनके खिलाफ एसआईटी जांच के आदेश दिए गए हैं।  योगी सरकार ने रामपुर के जौहर शोध संस्थान और ट्रस्ट में हुई गड़बड़ियों की शिकायत की जांच एसआईटी को सौंप दी है।

आजम खान पर आरोप है कि सरकारी खर्च और वक्फ की जमीन पर जौहर शोध संस्थान का निर्माण किया और गलत तरीके से इसे 99 साल के लिए ट्रस्ट को लीज पर दे दिया।

अल्पसंख्यक कल्याण राज्य मंत्री बलदेव सिंह औलख की सिफारिश पर मामले की जांच हो रही है। एसआईटी ने जौहर शोध संस्थान और ट्रस्ट में हुई गड़बड़ियों की शिकायत पर रामपुर डीएम, पीडब्ल्यूडी, सिंचाई विभाग, अल्पसंख्यक विभाग और लखनऊ में निबंधक, फर्म्स, सोसायटजी एंड चिट्स से दस्तावेज तलब किए हैं।

गौरतलब है कि रामपुर में जौहर विश्वविद्यालय के अलावा जौहर शोध संस्थान और जौहर ट्रस्ट भी है। बताया जा रहा है कि शोध संस्थान और ट्रस्ट को लेकर अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के राज्यमंत्री बलदेव सिंह औलख को कई शिकायतें मिली थीं। 

राज्यमंत्री बलदेव सिंह औलख ने बताया कि जिस जमीन पर शोध संस्थान बनाया गया है, वह जेल की जमीन थी। जेल से यह जमीन अल्पसंख्यक विभाग को मिली और बाद में वहां 20 करोड़ रुपए के सरकारी खर्च पर जौहर शोध संस्थान बना दिया गया। सरकारी खर्च और वक्फ की जमीन पर बने इस शोध संस्थान को बाद में ट्रस्ट को लीज पर दे दिया गया, जो कि पूरी तरह से गलत है।

अब एसआईटी इस बात की जांच करेगी कि किस आधार पर जेल की जमीन शोध संस्थान को दी गई। सरकारी खर्च पर तैयार हुए शोध संस्थान को ट्रस्ट को देने का आधार क्या था? इतना ही नहीं राज्यमंत्री ने बताया कि जौहर विश्वविद्यालय निजी यूनिवर्सिटी है, लेकिन उसमें पीडब्ल्यूडी ने करीब 200 करोड़ रुपए की लागत से सड़क बनवाई है।

इसकी भी जांच की जाएगी। जिस ट्रस्ट को शोध संस्थान की जमीन दी गई उसके पदाधिकारी कौन-कौन हैं और उसमें आजम खान शामिल हैं कि नहीं। दस्तावेज जुटाने के बाद एसआईटी शिकायतकर्ताओं, विभागों के अधिकारियों व अन्य लोगों को नोटिस देकर पूछताछ के लिए बुलाएगी।